अनुभव की कहानी
मेरी उम्र सिर्फ़ 4 साल थी जब पहली बार किसी बेज़ुबान का दर्द मेरे भीतर तक उतर गया। 14 साल की उम्र में मैंने चमड़ा त्याग दिया। तब से आज तक — 35 वर्षों से — यही मेरा जीवन है।
मैंने मंत्रियों को पत्र लिखे, Born Free Foundation से जुड़ा, डॉक्यूमेंट्री बनाईं और कविताएँ लिखीं — पर सबसे बड़ा काम वो है जो सड़कों पर होता है: एक घायल को उठाना, इलाज कराना, और उसे फिर से जीना सिखाना।
करुणा जागी
त्याग दिया
कल्याण सेवा












